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पर्युषण पर्व पर आप भी रखें Digital उपवास





पर्युषण पर्व





आप अपने फोन के मालिक हैं या आपका फोन आपका मालिक है अगर आप सोचेंगे तो आपका भी मानना यही होगा की आपका फोन ही आपका मालिक है क्योंकि जितना समय हम फोन पर बिताते हैं हमारा दिमाग की संतुलन भी फोन के हिसाब से बन जाता है जिस तरह हम अपने फोन का उपयोग अपनी दिनचर्या में करते हैं उसके साथ कई नकारात्मक बातें भी अपने अंदर अवशोषित कर लेते हैं, अब आपके सोच और विचार पर पूरी तरह आपके फोन का नियंत्रण होता जा रहा है।

जानिए:- मोबाइल फोन के प्रभाव
आप सुबह सबसे पहले क्या काम करते हैं आप लोगों में सबसे ज्यादा लोगों का यही जवाब होगा कि सबसे पहले वह अपना फोन चेक करते हैं जिस तरह आपका फोन नोटिफिकेशन दर्शाता है उसको देख कर आपके मन में उसी तरह के विचार जन्म लेते और साथ ही आपकी सारी ऊर्जा उस विषय पर केंद्रित हो जाते हैं। और नोटिफिकेशंस तय करते हैं कि आपका मूड कैसा होगा।
इसलिए हमने कहा फोन आपका मालिक है या आप फोन के मालिक

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यदि आपका फोन किसी के हाथ लग जाता है तो वह आपके व्यक्तित्व के बारे में सारी जानकारी एकत्र करने में सक्षम हो जाता है इसलिए हम कह सकते हैं कि फोन आपका छोटा दिमाग होता है जिसमें आप हर तरह की जानकारियां एकत्र करते हैं और यही फोन आपके व्यक्तित्व का आईना बन जाता है।

इस तरह हमारा जीवन एक फोन में कैद होकर रह गया है और आधुनिकता के इस युग में हम अपने आप को इन मशीनों के हवाले करते जा रहे हैं जिसके फायदे और नुकसान भी हैं।
इन्हीं हानियों के बारे में जैन समाज की जागरूकता बड़ी है और इस पर्युषण पर्व पर जैन धर्मावलंबियों ने कुछ अलग करने का प्रयास किया है । आपको बता दें 4 सितंबर से ११ सितंबर तक चलने वाले इस पर्यूषण पर्व को हमारे जैन धर्मावलंबी भाई बहुत उत्सुकता से मनाते हैं। पर्यूषण पर्व तप और त्याग का उत्सव होता है ।

Digital_उपवास
गुजरात के अहमदाबाद शहर के जैन समुदाय के लोगों ने इस त्यौहार को कुछ अलग बनाने की बात कही है। जिसमें वे लोग इस पर्युषण पर्व को एक थीम के अनुसार मनाएंगे जिस पर तब और त्याग के साथ-साथ अपने मोबाइल का भी त्याग करेंगे इन दिनों वे लोग अपने मोबाइल से दूरी बनाकर रखेंगे और इस थीम का नाम डिजिटल उपवास रखा गया है और साथ ही इस उपवास मैं एक प्रतियोगिता भी है इस प्रतियोगिता में जो प्रतिभागी हिस्सा लेंगे वह लोग 50 दिन तक कम से कम 1 दिन में 12 घंटे अपने मोबाइल फोन से दूर रहेंगे यदि ऐसा कर पाते हैं तो हर घंटे के हिसाब से उन्हें पॉइंट्स दिए जाएंगे और हर पॉइंट के बदले एक रुपए दिए जाएंगे इन दिनों जो भी इस उपवास को अपनाएंगे और तब के साथ-साथ त्याग का उदाहरण प्रस्तुत करेंगे और इन 50 दिनों के भीतर उनसे जमा वह राशि उनके नाम से दान कर दी जाएगी।
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इस पर्व को एक अलग नाम से भी मनाया जा रहा है जिसे डिजिटल उपवास नाम दिया गया है इसमें मोबाइल फोंस के साथ-साथ अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे लैपटॉप इंटरनेट टेलीविजन आदि का भी उपवास करना होगा।


और इस प्रतियोगिता को एक टैगलाइन दिया गया है जिसका नाम है-
A mobile phone is a good servant but a dangerous masters।
पर्युषण पर्व

हमें लगता है इस डिजिटल उपवास की जरूरत देश के हर उस व्यक्ति को है जो अपना ज्यादा से ज्यादा समय फोन पर बिताते हैं।
हमारे देश में करीब 70 से 75 करोड़ smartphone user है। जो औसतन 1 दिन में 6 से 7 घंटे अपना समय मोबाइल पर बिताते हैं। आपको जानकर हैरानी होगी की फोन पर वीडियो देखने कई मामले में भारत नंबर वन पर है जो औसतन हर रोज 5 से 6 घंटे मोबाइल पर ऑनलाइन वीडियो देखते हैं। 2020 में दुनिया में सबसे ज्यादा भारत के लोगों ने अपने आंखों की रोशनी गवांई।
Digital उपवास।
पर्युषणपर्व
ज्यादा से ज्यादा इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का उपयोग ना करते हुए हमें भी कुछ दिनों का डिजिटल उपवास समय-समय पर करते रहना चाहिए., इससे हमारा मन और शरीर दोनों स्वस्थ रहता है। आज के आधुनिक युग में जहां व्यक्ति अधिक से अधिक उपकरणों का उपयोग करके अपने जीवन को सरल बना रहा है वही इसके कई दुष्परिणाम भी होते हैं जिन्हें हमें अनदेखा नहीं करना चाहिए।


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